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#4211
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गुरु जी को सादर नमन,
प्रेम, एक ऐसा शब्द जो जितना प्यारा है, उतना ही रहस्यपूर्ण भी. शुरू कहाँ से हो जाती है पता नहीं, खत्म कहाँ कहना मुश्किल है. बिलकुल असीम. माना की दोनों की दुनिया के आयाम बदल गये. पर प्रेम ये देखता कहाँ है. इस दुनिया में भी तो लोग कुछ आयाम तोड़ कर एक-दुसरे को अपनाते हैं. हाँ, कई बार इसकी कीमत कुछ ज्यादा ही बड़ी हो जाती है. आपके संस्मरणों पर प्रतिउत्तर लिखना मेरी क्षमता से बाहर है. पर आपसे प्रेम है इसलिए ऐसे धृष्टता कर देता हूँ. कुछ गलत लिख जाऊं तो करबद्ध क्षमाप्रार्थी हूँ. सप्रेम. मेरे प्यारे गुरु जी. |
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#4212
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रेंटी भाई,
इस सूत्र को बंद कर दो आप. सभी सवाल जवाब तो अब आपके मुख्य सूत्र पर होने लगे है तो इस सूत्र का कोई अर्थ नही बचा. बस एक डर है कि इन सवाल-जवाबो के चक्कर मे मुख्य सूत्र पर कोई आँच ना आ जाये! |
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#4213
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गुरुजी सूक्ष्म शरीर और आत्मा क्या भिन्न-भिन्न होती हैं या दोनों एक ही तत्व हैं कृपया इस पर प्रकाश डालें
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नहीं, देखा जाए तो एक ही हैं दोनों! परन्तु कुछ भेद अवश्य है, आत्मा सूक्ष्म-शरीर कही जा सकती है जो सूक्ष्म-तत्व से सृजित तो रहती है परन्तु वो किसी स्थूल-तत्व को आवेशित भी कर सकती है! परम-सूक्ष्म-तत्व दिखाई नहीं देता, मध्यम-सूक्ष्ण-तत्व आत्मा है, सिद्धियों की सहायता से आप इसको अवश्य ही देख सकते हैं, स्थूल रूप में!
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#4215
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Pranam Maharaj aapko
ek prashn h man mein Sthool , Shookshm aur Karan sharir inme kya bhed h ? Sthool to samjha ja sakta h lekn Karan sharir kya hota haii ? kripya jigyasa shanrt kijiye |
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#4216
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Quote:
कारण शरीर में आहार शब्द का ,आवाज का, नाम का अर्थात अमृत का है। यहां की जीवात्मायें अमृत का भोजन करती हैं। कारण शरीर से सूक्ष्म, लिंग तथा स्थूल शरीर को देखा जा सकता है। परन्तु अन्य शरीरों से कारण शरीर के लोगों को नहीं देखा जा सकता। |
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#4217
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Quote:
Shah Talai wale (Diyotsidh) ???????????????????????? Last edited by rocky69_mail : 3 Hours Ago at 04:18 PM. |
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#4218
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jigyasa shant karne karne ke liye aapka dhanyvad
sadar pranam |